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यह क्या बोल गये भाई ?

   
   पढ़ने-सुनने में आता है कि राष्ट्रीय स्वयम् सेवक संघ राजनीति से स्वयम् को परे रखता है, फिर इसके सदस्य इन्द्रेश कुमार यह क्या कह गए ? राजस्थान पत्रिका, दि. 12-2-14 में पृष्ठ 14 पर प्रकाशित एक समाचार के अनुसार जोधपुर में  कल एक गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में इन्द्रेश जी ने मुसलमानों को हिंदुस्तान का मालिक बता दिया। भाई इंद्रेश जी, क्या आप धतूरा खा के बोल रहे थे ? भारत एक धर्म-निरपेक्ष राष्ट्र है और जब यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दू ही देश के मालिक नहीं हैं तो मुसलमान भला इस देश के मालिक कैसे हो गए ? पता नहीं इन्द्रेश जी ने यह कुटिल राजनैतिक वक्तव्य क्योंकर दिया, लेकिन उनका यह दिमागी दिवालियापन आर.एस.एस. की प्रतिष्ठा को आँच पहुंचाने वाला अवश्य है।


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अभिजीत तन्मय हो कर वृद्धाश्रम में बुज़ुर्गों को खाना खिला रहा था। परोसगारी में आश्रम का एक कर्मचारी राघव भी उसकी मदद कर रहा था।  "हाँ जी, आ जाइये।" -दरवाज़े पर एक व्यक्ति को खड़ा देख राघव ने कहा।   अभिजीत ने पलट कर देखा, उसका चचेरा भाई परेश आया था।  "भाई साहब, भाभी ने मुझे बताया कि आप यहाँ हैं, जबकि मैंने पहले ही आपको सूचित कर दिया था कि आज सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध है और मेरे यहाँ ब्राह्मण-भोज होगा। आपको भी भाभी के साथ मैंने अपने यहाँ निमंत्रित किया था न! मैं आपको लेने आया हूँ।" -परेश आते ही बोला।  "परेश, तुम उन पूर्वजों की शांति के लिए यह श्राद्ध करते हो, जिन्हें तुमने नहीं देखा, जबकि चाचा जी को वृद्धावस्था में अकेले छोड़ कर तुम अपने बीवी-बच्चों के साथ पृथक फ्लैट में रहते हो। क्या यह युक्तिसंगत है?... इन बुज़ुर्गों को देख रहे हो परेश? इनमें से कुछ लोग तो अपनी संतान के दुर्व्यवहार के कारण यहाँ हैं और कुछ को उनकी औलादों ने ही यहाँ छोड़ रखा है। ..." परेश और राघव चुपचाप खड़े अभिजीत को सुन रहे थे। अभिजीत ने कहना जारी रखा- "इन लोगों के न रहने पर इनकी औलादें द...

विनम्र श्रद्धांजलि !

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मुक्तक

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