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मुक्तक

                                                                           






             मुक्तक


          प्रभु से मेरी आरज़ू-

                                               रोटी मिले, कपड़ा मिले, छत मिले हर एक सिर को,

                                               माथे  पर  हर  इंसान  के,  सुकून  बेशुमार  चाहिए।

                                               प्यार हो  हर एक दिल में,  नफरत कहीं उपजे नहीं,

                                              रब, यही  मेरी  ख्वाहिश, बस  यही उपहार  चाहिए।

                                                                                         *****


Comments

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में रविवार 25 मई 2025 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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    1. बहुत दिनों से ब्लॉग पर नहीं आ पाया था। आज आपका यह निमंत्रण देखा। विलम्ब के लिए खेद है

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