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अच्छी राजनीति ग्राह्य क्यों नहीं ?

  मैं समझ नहीं पा रहा कि किसी नए नेता या पार्टी का उदय लोग पचा क्यों नहीं पाते। क्यों पहले से जमे हुए राजनेता किसी नये को उभरने  देना नहीं चाहते ? क्या राजनीति और सत्ता केवल पूर्व में स्थापित कुछ नेताओं की बपौती है ? 'AAP' का अभ्युदय हुए कुछ ही दिन हुए हैं, उन्हें सत्ता पर काबिज़ हुए भी बमुश्किल दो सप्ताह हुए हैं और उनके काम-काज की आलोचना कुछ विघ्न-संतोषी इस तरह कर रहे हैं जैसे कि इस पार्टी को काम करते हुए चार-पांच साल हो गए हों। जो कुछ केजरीवाल जी की इस सेना ने किया है उसका दशांश भी तो पूर्व की दिल्ली-सरकार और अन्य हालिया चयनित सरकारें नहीं कर पाई हैं अब तक। शायद उनकी अकर्मण्यता का यही बोझ उनके अनुयायियों को अनर्गल प्रलाप के लिए प्रेरित कर रहा है। 'AAP' के कार्यालय पर कुछ अराजक तत्वों द्वारा आक्रमण तथा अमेठी में डॉ. कुमार विश्वास के साथ किया गया दुर्व्यवहार इसका ज्वलंत उदाररण हैं।
  एक नये उत्साह और कुछ कर गुजरने की तमन्ना लेकर आये इन नौजवानों को कुछ करने का अवसर तो दो मित्रों ! यदि यह लोग भी निराश करते हैं तो जनता के पास शक्ति है न इन्हें भी उखाड़ फेंकने की। स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना के साथ इन्हें भी काम करने दो और स्वयं भी करो एवं निर्णय लेने का काम जनता पर छोड़ो। यदि  यह लोग कुछ गलत करते हैं तो बड़े भाई की तरह इन्हें दिशा-निर्देश दो। आखिर में, देश का उत्थान ही तो चाहते हैं यह, आप और हम सभी।

    'AAP' के लिए भी एक सन्देश !

 बंधु-गण, विपक्षी नेताओं की केवल स्वच्छ आलोचना करें तथा कटुता की राजनीति से परहेज करें। यदि विपक्ष का कोई अनुभवी और अच्छा नेता ऐसा है जो जन-साधारण में और जनता के एक बड़े वर्ग के दिल में जगह बनाये हुए है तो उसको उचित सम्मान दें।
     जहाँ तक असहिष्णु लोगों व अराजकतावादियों का प्रश्न है, स्पष्टतः यह समझा जा सकता है कि
यह लोग जिस संस्कृति में पले-बढ़े हैं और जो संस्कार इन्होंने पाये हैं उसके अनुसार ही तो आचरण करेंगे। तोड़-फोड़ और घृणा की राजनीति ही अब तक इन्होंने देखी और सीखी है। बेहतर व्यवहार की अपेक्षा भला इनसे क्यों ? समय लगेगा इन लोगों के दिमाग की धूल साफ़ करने में। सम्पूर्ण स्वच्छता के लिए अभी हम सभी को प्रतीक्षा करनी होगी। पुरातन काल से चली आ रही साम-दाम-दंड-भेद की नीति हर युग में ग्राह्य है- स्मरण रहे। 'दाम' से संतुष्टि को तो मैं घृणित मानता हूँ और ऐसी संतुष्टि ईमानदार व्यक्ति दे भी नहीं सकता, अतः 'दाम' के आलावा उपरोक्त तीनों उपाय इन्हें सुधारने के लिए काम में लेने होंगे।





  

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