अभिजीत तन्मय हो कर वृद्धाश्रम में बुज़ुर्गों को खाना खिला रहा था। परोसगारी में आश्रम का एक कर्मचारी राघव भी उसकी मदद कर रहा था। "हाँ जी, आ जाइये।" -दरवाज़े पर एक व्यक्ति को खड़ा देख राघव ने कहा। अभिजीत ने पलट कर देखा, उसका चचेरा भाई परेश आया था। "भाई साहब, भाभी ने मुझे बताया कि आप यहाँ हैं, जबकि मैंने पहले ही आपको सूचित कर दिया था कि आज सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध है और मेरे यहाँ ब्राह्मण-भोज होगा। आपको भी भाभी के साथ मैंने अपने यहाँ निमंत्रित किया था न! मैं आपको लेने आया हूँ।" -परेश आते ही बोला। "परेश, तुम उन पूर्वजों की शांति के लिए यह श्राद्ध करते हो, जिन्हें तुमने नहीं देखा, जबकि चाचा जी को वृद्धावस्था में अकेले छोड़ कर तुम अपने बीवी-बच्चों के साथ पृथक फ्लैट में रहते हो। क्या यह युक्तिसंगत है?... इन बुज़ुर्गों को देख रहे हो परेश? इनमें से कुछ लोग तो अपनी संतान के दुर्व्यवहार के कारण यहाँ हैं और कुछ को उनकी औलादों ने ही यहाँ छोड़ रखा है। ..." परेश और राघव चुपचाप खड़े अभिजीत को सुन रहे थे। अभिजीत ने कहना जारी रखा- "इन लोगों के न रहने पर इनकी औलादें द...
वाहह आदरणीय !!कितने आशिक पढ़ा दिए हमने👌👌👌
ReplyDeleteजर्रानवाज़ी के लिए शुक्रिया महोदया!
Deleteवाह!वाह!सर सराहनीय।
ReplyDeleteधन्यवाद आदरणीया अनीता जी!
Deleteजी नमस्ते ,
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (११-०१ -२०२२ ) को
'जात न पूछो लिखने वालों की'( चर्चा अंक -४३०६) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
आभार महोदया, अवश्य उपस्थिति दूँगा !
Deleteआपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (12-01-2022) को चर्चा मंच "सन्त विवेकानन्द" जन्म दिवस पर विशेष (चर्चा अंक-4307) पर भी होगी!
ReplyDelete--
सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार कर चर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
आभार आदरणीय मयंक जी, निश्चित ही उपस्थित रहूँगा!
Deleteक्या बात है .... उम्दा रूबाई ।
ReplyDeleteबहुत-बहुत शुक्रिया अमृता जी!
Deleteबहुत सुंदर उत्कृष्ट सृजन ।
ReplyDeleteमेरी इस साधारण रचना को इतना सम्मान देने के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ आ. जिज्ञासा जी!
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ReplyDeleteवाह सर 👏👏
सच में लाजवाब पंक्ति👌
धन्यवाद... आभार मनीषा जी!
Deleteवाह!!!
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर सराहनीय सृजन।
हार्दिक आभार महोदया!
Deleteउत्कृष्ट रचना...
ReplyDeleteआभार आपका विकास जी!
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