किसी खड़खड़ के चलते अहमद की नींद अचानक खुल गई। आँखें मलते हुए उसने उठ कर देखा, कमरे में बेभान सो रही उसकी बेगम रशीदा के अलावा और कोई नहीं था। घड़ी में देखा, रात के दो बज रहे थे। धीमे क़दमों से वह खिड़की की ओर बढ़ा और बाहर निगाह डाली तो चौंक पड़ा, पड़ोसी कासिम की खिड़की अधखुली थी। उसे ताज्जुब हुआ, 'कासिम का परिवार ईद मनाने के लिए दो दिन के लिए आज ही अपने गाँव गया है और वह लोग अपनी सभी खिड़कियाँ बंद कर के गये थे, फिर इनकी खिड़की खुली कैसे पड़ी है?' ध्यान से सुनने की कोशिश की तो आहिस्ता-आहिस्ता बोलने की आवाज़ भी उसे सुनाई दी। कुछ ही देर में कासिम के कमरे में दो पल के लिए एक रोशनी झपकी। 'शायद मोबाइल की टॉर्च की रोशनी थी',अहमद ने अंदाज़ लगाया। वह समझ गया, कासिम के घर में चोर घुस आये हैं। चाँदनी रात थी और कासिम के घर के पीछे से आ रही बादलों में छिपे चाँद की रोशनी दोनों मकानों के बीच के गलियारे को हल्का-सा रोशन कर रही थी, लेकिन कासिम के कमरे में रोशनी नहीं के बराबर थी। वह यूँ ह...
आदरणीय सर , इस विधा को सीखना चाहा सीख ना सकी | एक सहयोगी ने सीखाने वाले ग्रुप से जोड़ा भी था, पर सीख नहीं सकी | पर हाइकू विधा बहुत प्रभावी विधा है | गागर में सागर जैसी | बहुत सटीक लिखा है आपने . सभी हाइकू प्रभावी है | सादर
ReplyDeleteआपके लिए कोई नई चीज़ सीखना कठिन नहीं हो सकता रेनू जी! यह विधा सीखने में तो कठिन कतई नहीं है। ध्यान यह रखना होता है कि इसमें शब्दों का चयन सही व सटीक हो। एक हाइकू अपने आप में पूर्ण हो व एक प्रभाव छोड़ने वाला सार्थक अर्थ रखता हो। मेरा भी यह पहला प्रयास रहा है हाइकू लिखने का। इस विधा में एक हाइकू तीन पंक्तियों से बनता है। प्रथम पंक्ति में 5 वर्ण (अक्षर), द्वितीय में 7 तथा तृतीय में पुनः 5 होते हैं। डेढ़ अक्षर की गिनती भी एक अक्षर के रूप में ही होती है। यथा, 'क्लिष्ट' , 'नम्र' और 'सुख' - यह तीनों शब्द दो वर्ण वाले हैं। आप मेरे हायकू को ध्यान से देखें। तो फिर, हो जाइये शुरू...
Deleteअरे वाह ! बंद हो गयी अप्रूवल की बंदिश | कोटि आभार मेरे सुझाव पर मनन करने के लिए |
ReplyDeleteआपके सुझाव सहज स्वीकरणीय होते हैं स्नेहमयी रेणु जी, उन पर मनन की ज़रुरत कैसे हो सकती है😊?
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