अभिजीत तन्मय हो कर वृद्धाश्रम में बुज़ुर्गों को खाना खिला रहा था। परोसगारी में आश्रम का एक कर्मचारी राघव भी उसकी मदद कर रहा था। "हाँ जी, आ जाइये।" -दरवाज़े पर एक व्यक्ति को खड़ा देख राघव ने कहा। अभिजीत ने पलट कर देखा, उसका चचेरा भाई परेश आया था। "भाई साहब, भाभी ने मुझे बताया कि आप यहाँ हैं, जबकि मैंने पहले ही आपको सूचित कर दिया था कि आज सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध है और मेरे यहाँ ब्राह्मण-भोज होगा। आपको भी भाभी के साथ मैंने अपने यहाँ निमंत्रित किया था न! मैं आपको लेने आया हूँ।" -परेश आते ही बोला। "परेश, तुम उन पूर्वजों की शांति के लिए यह श्राद्ध करते हो, जिन्हें तुमने नहीं देखा, जबकि चाचा जी को वृद्धावस्था में अकेले छोड़ कर तुम अपने बीवी-बच्चों के साथ पृथक फ्लैट में रहते हो। क्या यह युक्तिसंगत है?... इन बुज़ुर्गों को देख रहे हो परेश? इनमें से कुछ लोग तो अपनी संतान के दुर्व्यवहार के कारण यहाँ हैं और कुछ को उनकी औलादों ने ही यहाँ छोड़ रखा है। ..." परेश और राघव चुपचाप खड़े अभिजीत को सुन रहे थे। अभिजीत ने कहना जारी रखा- "इन लोगों के न रहने पर इनकी औलादें द...
आदरणीय सर , इस विधा को सीखना चाहा सीख ना सकी | एक सहयोगी ने सीखाने वाले ग्रुप से जोड़ा भी था, पर सीख नहीं सकी | पर हाइकू विधा बहुत प्रभावी विधा है | गागर में सागर जैसी | बहुत सटीक लिखा है आपने . सभी हाइकू प्रभावी है | सादर
ReplyDeleteआपके लिए कोई नई चीज़ सीखना कठिन नहीं हो सकता रेनू जी! यह विधा सीखने में तो कठिन कतई नहीं है। ध्यान यह रखना होता है कि इसमें शब्दों का चयन सही व सटीक हो। एक हाइकू अपने आप में पूर्ण हो व एक प्रभाव छोड़ने वाला सार्थक अर्थ रखता हो। मेरा भी यह पहला प्रयास रहा है हाइकू लिखने का। इस विधा में एक हाइकू तीन पंक्तियों से बनता है। प्रथम पंक्ति में 5 वर्ण (अक्षर), द्वितीय में 7 तथा तृतीय में पुनः 5 होते हैं। डेढ़ अक्षर की गिनती भी एक अक्षर के रूप में ही होती है। यथा, 'क्लिष्ट' , 'नम्र' और 'सुख' - यह तीनों शब्द दो वर्ण वाले हैं। आप मेरे हायकू को ध्यान से देखें। तो फिर, हो जाइये शुरू...
Deleteअरे वाह ! बंद हो गयी अप्रूवल की बंदिश | कोटि आभार मेरे सुझाव पर मनन करने के लिए |
ReplyDeleteआपके सुझाव सहज स्वीकरणीय होते हैं स्नेहमयी रेणु जी, उन पर मनन की ज़रुरत कैसे हो सकती है😊?
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