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अधिक प्यारा कौन?




मेरे एक मित्र ने मुझसे एक नितान्त व्यक्तिगत प्रश्न पूछ लिया- "तुम लोग अपने बेटे से अधिक प्यार करते हो या बिटिया से?"

"यह कैसा प्रश्न है यार? हम तो दोनों से बराबर प्यार करते हैं।" -मैंने बेबाकी से जवाब दिया। 

"फिर भी कुछ तो फर्क होगा, सही-सही बताओ न दोस्त!"

"सही जानना चाहते हो तो सुनो! हम अपनी बिटिया को बेटे से अधिक प्यार करते हैं और..."

"और...और क्या?" -मित्र के चेहरे पर संतोष की मुस्कान थी। उन्हें शायद अपना प्रश्न पूछना सार्थक लगा था।

"और अपने बेटे को बिटिया से अधिक प्यार करते हैं।" -मैंने अपना वाक्य पूरा किया। 

सुन कर मित्रवर असहज हो उठे और अनायास ही वार्तालाप का रुख राजनीति की तरफ कर लिया। 

*****



Comments

  1. जटिल प्रश्न की सटीक उत्तर....
    अद्भुत।

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 10 नवंबर 2022 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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    Replies
    1. मेरी रचना को इस सुन्दर मंच पर स्थान देने के लिए आभार प्रिय यादव साहब!

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  3. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा गुरुवार 10 नवंबर 2022 को 'फटते जब ज्वालामुखी, आते तब भूचाल' (चर्चा अंक 4608) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। 12:01 AM के बाद आपकी प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

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    1. असीम आभार आदरणीय भाई रवीन्द्र जी!

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  4. भ्रमित का सही इलाज

    उम्दा लेखन

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    1. वाह आ. विभा जी, एकदम सटीक टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद!

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  5. प्यार में कम ज़्यादा होता ही नहीं ! प्यार अनंत है

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  6. भ्रम का सही निष्पादन बड़ी ही सटीक और सार्थक रचना आदरणीय

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    1. सार्थक टिप्पणी के लिए आभारी हूँ महोदया अभिलाषा जी!

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  7. आदरणीय सर , सादर प्रणाम चतुराई और हास्य का सुंदर मेल कराती मजेदार रचना पढ़ कर मन आनंदित है । अनुचित प्रश्न पूछने वालों को निपटने का बहुत ही अच्छा तरीका । आज आपके ब्लॉग पर पहली बार आना हुआ । अब से आती रहूँगी । सुंदर रचना को पढ़ने के लिए हृदय से आभार व पुनः प्रणाम , साथ एक अनुरोध भी , कृपया मेरे ब्लॉग पर आ कर मुझे अपना आशीष दें ।

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    1. #मेरा ब्लॉग आपका सदैव स्वागत करेगा। मैं आपके ब्लॉग पर अभी गया था और अपनी प्रतिक्रियात्मक अनुभूति आपकी एक रचना 'सदा सुरक्षित घर आना' पर छोड़ आया हूँ😍।

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  8. निहायत ही जटिल प्रश्न माता पिता के लिए ।
    परंतु आपका उत्तर इतना सार्थक है कि प्रश्न प्रश्न ही रह गया । सामने वाला खुद निरुत्तर होने को बाध्य हो गया ।

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    1. आभार प्रकट करता हूँ जिज्ञासा जी!

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