सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शेर जाग गया है...

 
    मैं अब तक अपने संपर्क में आये चार-पांच व्यक्तियों को सख्त नापसंद करता हूँ। आज मुझे सवर्ण-वर्ग में पैदा होने का बेहद अफ़सोस है।
काश! मैं SC/ST वर्ग का होता तो उन पाँचों व्यक्तियों के विरुद्ध अनर्गल शिकायत कर के उन्हें गिरफ्तार करवा देता, कोई जांच भी नहीं होती और वह कम्बख्त सड़ते रहते जेल में। .... लेकिन ऐसा नहीं हो सकता, कम-से-कम इस जन्म में तो नहीं।
   हमने समाचार पत्र में पढ़ा-- सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलट कर SC/ST संशोधन विधेयक पारित किये जाने के बाद सामजिक न्याय (?) मंत्री थावर चन्द गहलोत ने कहा कि सरकार दलितों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है (यानी कि सवर्णों को बर्बाद करने को कटिबद्ध है)।
   सरकार (चाहे वह किसी भी दल की हो) को सवर्णों के वोट की कोई चिंता नहीं है क्योंकि उसकी नज़रों में यह ऐसा मूर्ख वर्ग है जो सहनशीलता, विवेक और संजीदगी के दुर्गुणों से युक्त है, वह सड़कों पर उतर कर विरोध नहीं करता, तोड़फोड़ नहीं करता।
   सरकार को दलित वर्ग की चिंता है (उनके वोट के कारण), उनके लिए वह सुप्रीम कोर्ट का आदेश तो क्या विधाता के विधान को भी पलटने को तत्पर हो जायेगी।
   प्रजातन्त्र का ऐसा दुरूपयोग, इतना सर्वनाश होगा, देश की आज़ादी के पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।
   लेकिन शेर कब तक सोया रहता, कभी तो जागता ही ... और वह जाग गया है। सवर्ण भी अब आन्दोलन की राह पर हैं। माना कि यह वर्ग हिसक नहीं है, विध्वंसक नहीं है, लेकिन अहिंसा की शक्ति से हम सब अपरिचित तो नहीं!
   ..... "सत्यमेव जयते!"
   





टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"ऐसा क्यों" (लघुकथा)

                                   “Mother’s day” के नाम से मनाये जा रहे इस पुनीत पर्व पर मेरी यह अति-लघु लघुकथा समर्पित है समस्त माताओं को और विशेष रूप से उन बालिकाओं को जो क्रूर हैवानों की हवस का शिकार हो कर कभी माँ नहीं बन पाईं, असमय ही काल-कवलित हो गईं। ‘ऐसा क्यों’ आकाश में उड़ रही दो चीलों में से एक जो भूख से बिलबिला रही थी, धरती पर पड़े मानव-शरीर के कुछ लोथड़ों को देख कर नीचे लपकी। उन लोथड़ों के निकट पहुँचने पर उन्हें छुए बिना ही वह वापस अपनी मित्र चील के पास आकाश में लौट आई। मित्र चील ने पूछा- “क्या हुआ,  तुमने कुछ खाया क्यों नहीं ?” “वह खाने योग्य नहीं था।”- पहली चील ने जवाब दिया। “ऐसा क्यों?” “मांस के वह लोथड़े किसी बलात्कारी के शरीर के थे।” -उस चील की आँखों में घृणा थी।              **********

व्यामोह (कहानी)

                                          (1) पहाड़ियों से घिरे हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में एक छोटा सा, खूबसूरत और मशहूर गांव है ' मलाणा ' । कहा जाता है कि दुनिया को सबसे पहला लोकतंत्र वहीं से मिला था। उस गाँव में दो बहनें, माया और विभा रहती थीं। अपने पिता को अपने बचपन में ही खो चुकी दोनों बहनों को माँ सुनीता ने बहुत लाड़-प्यार से पाला था। आर्थिक रूप से सक्षम परिवार की सदस्य होने के कारण दोनों बहनों को अभी तक किसी भी प्रकार के अभाव से रूबरू नहीं होना पड़ा था। । गाँव में दोनों बहनें सबके आकर्षण का केंद्र थीं। शान्त स्वभाव की अठारह वर्षीया माया अपनी अद्भुत सुंदरता और दीप्तिमान मुस्कान के लिए जानी जाती थी, जबकि माया से दो वर्ष छोटी, किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटने वाली विभा चंचलता का पर्याय थी। रात और दिन की तरह दोनों भिन्न थीं, लेकिन उनका बंधन अटूट था। जीवन्तता से भरी-पूरी माया की हँसी गाँव वालों के कानों में संगीत की तरह गूंजती थी। गाँव में सबकी चहेती युवतियाँ थीं वह दोनों। उनकी सर्वप्रियता इसलिए भी थी कि पढ़ने-लिखने में भी वह अपने सहपाठियों से दो कदम आगे रहती थीं।  इस छोटे

पुरानी हवेली (कहानी)

   जहाँ तक मुझे स्मरण है, यह मेरी चौथी भुतहा (हॉरर) कहानी है। भुतहा विषय मेरी रुचि के अनुकूल नहीं है, किन्तु एक पाठक-वर्ग की पसंद मुझे कभी-कभार इस ओर प्रेरित करती है। अतः उस विशेष पाठक-वर्ग की पसंद का सम्मान करते हुए मैं अपनी यह कहानी 'पुरानी हवेली' प्रस्तुत कर रहा हूँ। पुरानी हवेली                                                     मान्या रात को सोने का प्रयास कर रही थी कि उसकी दीदी चन्द्रकला उसके कमरे में आ कर पलंग पर उसके पास बैठ गई। चन्द्रकला अपनी छोटी बहन को बहुत प्यार करती थी और अक्सर रात को उसके सिरहाने के पास आ कर बैठ जाती थी। वह मान्या से कुछ देर बात करती, उसका सिर सहलाती और फिर उसे नींद आ जाने के बाद उठ कर चली जाती थी।  मान्या दक्षिण दिशा वाली सड़क के अन्तिम छोर पर स्थित पुरानी हवेली को देखना चाहती थी। ऐसी अफवाह थी कि इसमें भूतों का साया है। रात के वक्त उस हवेली के अंदर से आती अजीब आवाज़ों, टिमटिमाती रोशनी और चलती हुई आकृतियों की कहानियाँ उसने अपनी सहेली के मुँह से सुनी थीं। आज उसने अपनी दीदी से इसी बारे में बात की- “जीजी, उस हवेली का क्या रहस्य है? कई दिनों से सुन रह