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सितंबर, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

एक देश-एक चुनाव (One Nation - One Election)

'गोदी मीडिया', 'गोदी मीडिया' कह कर शोर मचाने वाले यह 'रोती मीडिया' (मेरे द्वारा किया गया नामकरण) के नाकारा पत्रकार भारत सरकार के हर फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया करके निरन्तर जहर उगला करते रहते हैं। अभी हाल में एक नया मुद्दा इनकी खुराक बना है - 'वन नेशन, वन इलेक्शन'।  सामान्य बुद्धि रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस मिशन की सार्थक उपयोगिता समझ सकता है, लेकिन रोती मीडिया के यह विघ्न-संतोषी तथाकथित पत्रकार इसमें भी दोष ही दोष बता कर तूफान खड़ा कर रहे हैं; इसमें बीजेपी का ही फायदा है, यह बताने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं।  हमारे देश के ख्यात झूठ-सम्राट तो कहते हैं कि बीजेपी वाले यह मिशन लाना चाहते हैं, ताकि पांच साल तक उन्हें जनता के सामने नहीं आना पड़े। यानी वह यह तो मान ही रहे हैं कि बीजेपी ही अगली बार भी सता में आएगी। अरे भई, व्यर्थ की अविवेकतापूर्ण बातें करने और झूठी नौटंकी करने के बजाय वास्तविकता की धरती पर कुछ अच्छे काम कर दिखाने का प्रयास करो तो तुम लोग भी सत्ता में आ सकोगे। फिर बने रहना सत्ता में पाँच साल तक, कौन रोकता है? 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के मिश...

दलित वर्ग - सामाजिक सोच व चेतना

     'दलित वर्ग एवं सामाजिक सोच'- संवेदनशील यह मुद्दा मेरे आज के आलेख का विषय है।  मेरा मानना है कि दलित वर्ग स्वयं अपनी ही मानसिकता से पीड़ित है। आरक्षण तथा अन्य सभी साधन- सुविधाओं का अपेक्षाकृत अधिक उपभोग कर रहा दलित वर्ग अब वंचित कहाँ रह गया है? हाँ, कतिपय राजनेता अवश्य उन्हें स्वार्थवश भ्रमित करते रहते हैं। जहाँ तक आरक्षण का प्रश्न है, कुछ बुद्धिजीवी दलित भी अब तो आरक्षण जैसी व्यवस्थाओं को अनुचित मानने लगे हैं। आरक्षण के विषय में कहा जा सकता है कि यह एक विवादग्रस्त बिन्दु है। लेकिन इस सम्बन्ध में दलित व सवर्ण समाज तथा राजनीतिज्ञ, यदि मिल-बैठ कर, निजी स्वार्थ से ऊपर उठ कर कुछ विवेकपूर्ण दृष्टि अपनाएँ तो सम्भवतः विकास में समानता की स्थिति आने तक चरणबद्ध तरीके से आरक्षण में कमी की जा कर अंततः उसे समाप्त किया जा सकता है।  दलित वर्ग एवं सवर्ण समाज, दोनों को ही अभी तक की अपनी संकीर्ण सोच के दायरे से बाहर निकलना होगा। सवर्णों में कोई अपराधी मनोवृत्ति का अथवा विक्षिप्त व्यक्ति ही दलितों के प्रति किसी तरह का भेद-भाव करता है। भेदभाव करने वाला व्यक्ति निश्चित रूप स...

आर्टिकल 370

  'आर्टिकल 370', कल यह मनभावन मूवी देखी। सत्य वाक़ये पर आधारित इस मूवी में कुछ काल्पनिक घटनाओं व दृश्यों का समावेश भी किया गया है। फिल्म की रोचकता बनाये रखने के लिए ऐसा करना ज़रूरी हो जाता है, अन्यथा तो यह एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बन कर रह जाती। मूवी देख कर मन कुछ आन्दोलित हुआ तो गर्व से आल्हादित भी हो उठा। पुलवामा हादसे से उपजा दिल का दर्द फिर सजीव हो उठा, आँखें सजल हो गईं और देश के लिए शहीद हुए जवानों के प्रति नतमस्तक भी हुआ🙏।   देशहित में किये गए कई अच्छे कार्यों के साथ कुछ ग़लतियाँ भी मोदी सरकार ने की होंगी, लेकिन कश्मीर को धारा 370 से मुक्त करने का काम निस्संदेह उन सब पर भारी है।   चिरकाल तक कृतज्ञ रहेगा यह राष्ट्र इस अभियान में अपना जीवन समर्पित करने वाले वीर जवानों का और मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में उठाये गए इस साहसिक कदम के लिए तत्कालीन समस्त प्रशासन का, जिसके कारण स्वार्थ व अदूरदर्शितावश वर्षों पूर्व तत्कालीन नेतृत्व द्वारा देश के मस्तक पर पोता गया यह कलङ्क मिट सका, अन्यथा तो ऐसा होने की मात्र कल्पना ही की जा सकती थी। *********