राजकीय बाल गृह में अफरातफरी मच गई थी। बाल गृह की महिला सहायिका ने बाल कल्याण अधिकारी के आने की सूचना चपरासी से मिलते ही अधीक्षक-कक्ष में जा कर अधीक्षक को बताया। अधीक्षक ने कुछ कागज़ात इधर-उधर छिपाये और शीघ्रता से अधिकारी जी की अगवानी हेतु कक्ष से बाहर निकले। अधिकारी के समक्ष झुक कर नमस्कार करते हुए अधीक्षक ने स्वागत किया- "पधारिये, स्वागत है श्रीमान!" "धन्यवाद! मैं, बृज गोपाल, बाल कल्याण अधिकारी! मेरी यह नई पोस्टिंग है। कैसा चल रहा है काम-काज?" "बस सर, अच्छा ही चल रहा है आपकी कृपा से। आइये, ऑफिस में पधारिये।" -चेहरे पर स्निग्ध मुस्कराहट ला कर अधीक्षक बोले। अधीक्षक के साथ कार्यालय में आ कर बृज गोपाल ने चारों ओर नज़र घुमा कर देखा। दो-तीन मिनट की औपचारिक बातचीत के बाद उन्होंने बाल गृह से सम्बन्धित कुछ फाइल्स मंगवा कर देखीं। ऑफिस-रिकॉर्ड के अनुसार अधीक्षक के अलावा बाल गृह में एक महिला व एक कर्मचारी सहायक के रूप में कार्य करते थे। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी था, जो चौकीदारी का दायित्व भी निभाता था। बाल गृह में कुल 28 बच्चे थे। अधीक्षक-कक्ष के अलावा बारह कमरे और ...