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उफ्फ्फ...यह नर-पिशाच !


क्या हमारे देश का मौज़ूदा कानून इस दरिंदे को इसके सही अंजाम तक पहुंचा सकेगा?...मैं निर्धारित करता हूँ इसका सही मुकाम! यह बीच चौराहे सड़क पर पड़ा हो, चारों तरफ से कई लोग इसे नुकेले हथियारों से गोंद रहे हों और एक व्यक्ति इसके जख्मों पर नमक-मिर्च छिड़क रहा हो इसके प्राणान्त तक और...और इसमें कानून की पूरी सहमति हो। यह भी कि मानवाधिकार वाले इस घृणित व्यक्ति के कुकर्मों से पीड़ित बच्चों में अपना स्वयं का बच्चा देखें। शायद मैं अभी भी इस नर-पिशाच के प्रति नर्म व्यवहार तजवीज़ कर रहा हूँ!

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मुक्तक

                                                                                         मुक्तक            प्रभु से मेरी आरज़ू -                                                 रोटी मिले , कपड़ा मिले , छत मिले हर एक सिर को ,                                                माथे   पर...