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विकास की ओर कदम (?)

राजस्थान के ताज़ातरीन मंत्री बने श्री कृपलानी ने 30 फीट रोड़ पर मकानों में बनी दुकानों व शोरूम आदि के नियमन की सिफारिश की है। 30 फीट रोड़ वाली कॉलोनी में जहाँ दूकानें चल रही हैं वहाँ के हालात कुछ इस तरह के हैं कि मकानों की चारदीवारी के पास तो दाएं-बाएं कॉलोनी-वासियों के कार-स्कूटर खड़े रहते हैं और अगल-बगल जहाँ भी जगह मिल जाती है, दुकानों के ग्राहक अपने वाहन खड़े कर देते हैं। अब वहाँ से गुजरने वाले वाहन और बूढ़े-बच्चे व महिलाएं पुरस्कार योग्य कौशल से निकल तो लेते हैं पर कभी कभार अपने गंतव्य पर पहुँचने के बजाय हॉस्पिटल पहुँचने की नौबत आ जाती है।

अगरचे इस विभीषिका से मंत्रीजी अन्जान नहीं हैं और वहां दुकानों का नियमन भी आवश्यक है तो रहवासी लोगों की संख्या का आंकलन कर छोटे-छोटे यान बनवाकर उन्हें उपलब्ध कराएं ताकि लोग अपने कार्यस्थल से सीधे ही अपने मकान की छतों पर उतर सकें। मंत्री है आप, क्या नहीं कर सकते!
दुखद आश्चर्य है कि राजस्थान पत्रिका जैसे स्तरीय समाचार पत्र ने अपने 'पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क' में इस अवांछनीय प्रक्रिया को 'नगरपालिका क्षेत्रों को बड़ी राहत' बतलाया है।
काश! इस संवेदनीय मुद्दे पर कोई मनन करे, इस आवाज़ को समर्थ व्यक्ति/शासन तक पहुंचाने का श्रम करे!



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