गहन अध्ययन और शोध के उपरान्त यह तथ्य उजागर हुआ कि भक्तों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है- 1) सामान्य भक्त 2) अन्ध भक्त तो मित्रों, सन्दर्भ है अभी हाल ही दिल्ली में हुए चुनावों का। चुनाव के परिणामों के बाद सामान्य भक्तों ने वस्तु-स्थिति को समझा, गुणावगुणों के आधार पर अपने भक्ति-भाव की समीक्षा की और अन्ततः सत्य को स्वीकार कर केजरीवाल की विजय का स्वागत भी किया। सत्य की राह पर आने के लिए उन्हें हार्दिक बधाई! अन्ध भक्त अखाड़े में उतरे उस दम्भी पहलवान के समान हैं जो चित्त होने के बाद भी अपनी टांग ऊँची कर कहे कि वह हारा नहीं है। यह लोग 'खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे' के ही अंदाज़ में अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं मानो सच्चाई को ही बदल देंगे। इनको कोई समझाए कि वह उनके नेताओं के झूठ, चापलूसी व अकर्मण्यता से उपजी विफलता को समझें और स्वीकारें। जितना झूठ और विष केजरीवाल के विरुद्ध उंडेला ...