1) एक जाने-माने वक़ील ने अपने मुवक्किल (जिसने क़त्ल किया था) को कोर्ट से बाइज्ज़त बरी करवा लिया और विपक्षी निर्दोष व्यक्ति के विरुद्ध सज़ा-ए=मौत का फैसला करवा दिया। कुछ लोगों ने इस पर वाह-वाही की तो कुछ लोगों ने थू-थू कर धिक्कारा। उस मुकद्दमे के दर्शक रहे एक संवेदनशील परिचित ने अगले दिन वक़ील को फोन कर पूछा- 'वक़ील सा., रात को नींद तो ठीक से आई न ?' वक़ील ने कहा- 'अरे नहीं भाई, नींद कहाँ से आती। रात भर सोचता ही रहा।' परिचित कुछ आश्वस्त हो बोला- 'शुक्र है, क्या ख़याल आते रहे ?' वक़ील- 'यही जनाब कि मेरे एक दूसरे मुवक्किल को बचाने के लिए मुझे क्या-क्या करना है जिसने बलात्कार के बाद एक नाबालिग की हत्या कर दी थी। कल उसके लिए जवाबदावा पेश करना है।' ...