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Showing posts from March, 2026

अधूरी चिट्ठियाँ (कहानी)

अधूरी चिट्ठियाँ मारवाड़ और शेखावाटी की सीमा के पास स्थित गाँव कांटी में रहता था रामजी। गाँव की चौपाल से कुछ दूरी पर एक बरगद का पेड़ था। उस पेड़ के पास ही दो कमरों और केलू की छत वाले घर में रहने वाला रामजी, चार दर्जे तक पढ़ा, एक साधारण किसान था, जिसके हाथों में खेतों की मिट्टी की खुशबू थी और दिल में एक अबूझ खलिश। गाँव की सरहद पर खड़ा वह पुराना बरगद का पेड़ सदियों से चुपचाप समय का गवाह बना हुआ था। उसकी जड़ें मिट्टी में गहरी पैठी हुईं थीं, वैसे ही जैसे रामजी की जिंदगी गाँव की मिट्टी से जुड़ी हुई थी। उसकी उम्र अब सित्तर के पार थी, लेकिन आँखों में अभी भी वह चमक थी जो बेटी राधा के बचपन की यादों से जुड़ी थी। हर शाम, जब अपने खेत से लौटता, जब सूरज की लालिमा आसमान को छूती, रामजी बरगद के नीचे बैठता। उसके हाथ में एक फटी-पुरानी डायरी होती, और कलम जो अब उसकी कांपती उंगलियों में लड़खड़ाती थी। वह लिखता, लेकिन कभी पूरा नहीं लिख पाता, हर चिट्ठी अधूरी रह जाती। रामजी की जिंदगी बहुत तकलीफ़ वाली रही थी। जवानी में उसने अपनी पत्नी, लक्ष्मी को खो दिया था। लक्ष्मी की मौत ने उसे तोड़ दिया था, लेकिन राधा, उनकी इकलौती ...